धामी सरकार के अभियान के तहत नानकमत्ता में सिंचाई विभाग की भूमि से हटाई गई अवैध मजार
स्वदेशी टाइम्स, खटीमा : Nanakmatta उधम सिंह नगर जिले के नानकमत्ता क्षेत्र में सरकारी भूमि पर बने एक अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नानक सागर डैम के समीप सिंचाई विभाग की जमीन पर निर्मित एक मजारनुमा संरचना को पुलिस, राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने हटाया।
प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित संरचना को लेकर पहले ही नोटिस जारी किया गया था और भूमि स्वामित्व से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया था। निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद संबंधित पक्ष कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका।
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि जिलाधिकारी नितिन भदौरिया के निर्देश पर करीब एक माह पहले नोटिस जारी किया गया था। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान संरचना के नीचे किसी प्रकार के अवशेष या विशेष सामग्री नहीं मिली। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार लंबे समय से सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में लगभग 12 हजार एकड़ सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जा चुका है। सरकार का दावा है कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और भूमि संरक्षण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
उत्तराखंड में मई 2023 से अतिक्रमण हटाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शुरुआत में वन विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र की भूमि पर कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद अन्य विभागों ने भी अपनी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक राज्य में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी 593 मजारों और 42 अन्य धार्मिक संरचनाओं को हटाया जा चुका है। उधम सिंह नगर प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी सरकारी भूमि पर किए गए किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
नानकमत्ता में की गई यह कार्रवाई प्रशासन के उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
