हरीश रावत का आरोप—‘शंकराचार्य भी भाजपा के पक्ष में’, माघ मेले विवाद ने पकड़ा तूल

स्वदेशी टाइम्स, देहरादून: मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने भक्तों के साथ संगम पर स्नान करने के लिए पहुंचे थे. जहां प्रशासन ने भीड़ ज्यादा होने की वजह से रोक दिया था और पैदल जाने का आग्रह किया था, जिसे लेकर काफी नोकझोंक देखने को मिला था. अब इसी मामले को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आया है. हरीश रावत ने भाजपा पर करारा हमला बोला है.

हरीश रावत ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, अब तो शंकराचार्य भी भाजपा ही नियुक्त करेगी. जिसे भाजपा मान्यता देगी वही शंकराचार्य का आदर पायेंगे. शंकराचार्य सनातन परंपरा है. अब पता चला उसमें भी यह अधिकार सरकार ने अपने ऊपर ले लिया है कि कौन से शंकराचार्य जी वैध हैं, कौन से अवैध हैं? सारा ज्योतिष पीठ क्षेत्र जिन्हें शंकराचार्य मानकर उनके चरणधुल्य लेता है. अब पता चल रहा है बकौल सत्ता सूत्रों के कि वह शंकराचार्य है ही नहीं. शंकराचार्य एक संस्था है, सनातन की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है उसके अवमूल्यन का अधिकार किसी सत्ता को नहीं दिया जा सकता है. मैं कल 22 जनवरी को अपने आवास पर 1 घंटे मौन व्रत रखूंगा और भाजपा की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करूंगा.

संतों के साथ मारपीट का आरोप

मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु बड़ी संख्या में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे थे. जिसके कारण संगम पर गहमागहमी की स्थिति हो गई थी. इसी बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी संगम पहुंचे थे, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से प्रशासन ने उन्हें रोक दिया था. प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया था. इस पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया था. शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने संतों के साथ मारपीट की है. उन्होंने कहा कि जब प्रशासन ने हमें रोका तो अब सहयोग के लिए तैयार थे. जब हम वापस जाने लगे तो पुलिस ने संतों और भक्तों से मारपीट करन लगे.

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