जिसकी हत्या में जेल में बंद है नरेंद्र…वह जिंदा मिला, ढाई साल बाद बरी

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स्वदेशी टाइम्स, शाहजहांपुर: जिसकी हत्या में नरेंद्र कुमार दुबे ढाई साल से जेल में बंद है, वह जिंदा मिल गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का आदेश दिया है। हालांकि मिली लाश किसकी थी यह सवाल अब भी है। कोर्ट ने भविष्य में बरी किए गए नरेंद्र के खिलाफ मुकदमा चलाने का विकल्प खुला रखा है। इस फैसले का वास्तव में ट्रेन से फेंके गए व्यक्ति की शिनाख्त होने की स्थिति में उस केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उस रात किसी को तो ट्रेन से फेंका गया था। किसी के तो नरेंद्र के हाथों मारे जाने की आशंका है। लाश मिली है इसलिए कहा जा रहा है कि किसी न किसी की हत्या जरूर की गई है।

बरेली जंक्शन थाने के हेड कॉस्टेबल सत्यवीर सिंह ने 15 दिसंबर 2022 को घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया था कि अयोध्या के रहने वाले आलोक ने सीयूजी नंबर पर सूचना दी थी कि दिल्ली-अयोध्या के जनरल कोच डी-2 में एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति को मारपीट कर तिलहर रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया है। आलोक ने पुलिस को घटना का वीडियो भी उपलब्ध कराया था। ट्रेन जब बरेली में रुकी तो पुलिस ने वीडियो के आधार पर मारपीट करने वाले नरेंद्र कुमार दुबे निवासी 1127 संगम विहार कॉलोनी, थाना नंदग्राम जिला गाजियाबाद को पकड़ लिया। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। कुछ यात्रियों ने नरेंद्र दुबे के खिलाफ युवक के साथ मारपीट कर बाहर फेंकने की गवाही भी दी थी।

बरेली पुलिस ने शाहजहांपुर जीआरपी को सूचित कर पटरी के पास पड़े किसी घायल या मृत व्यक्ति के संबंध में जानकारी मांगी। बाद में तिलहर क्षेत्र में रेलवे पटरी पर एक शव मिला था। ट्रेन यात्रियों ने उसकी पहचान कर ली थी और बताया था कि नरेंद्र ने इसी की हत्या की है। पुलिस ने पहचान कराने के लिए फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए थे। सोशल मीडिया पर फोटो देखकर बिहार के मुजफ्फरपुर के थाना क्षेत्र कुड़नी के गांव तारसन सुमेरा के रहने वाला मोहम्मद याकूब 21 दिसंबर को शाहजहांपुर के जिला अस्पताल पहुंचे।

यहां उन्होंने पुलिस को बताया कि यह शव उनके बेटे मोहम्मद ऐताब है। शिनाख्त के बाद याकूब ने अपने बेटे का शव मानकर अंतिम संस्कार शाहजहांपुर में ही मुस्लिम रीति-रिवाज से कर दिया। घटना के छह महीने के बाद जब ऐताब गुजरात से अपने घर पहुंचा तो सब लोग उसे जिंदा देखकर चौंक गए। आसपास के लोगों ने उसके वीडियो बनाए और पुलिस को सूचना दे दी। शाहजहांपुर की पुलिस उसके घर गई और उसे अपने साथ लेकर शाहजहांपुर आ गई। यहां पर न्यायालय में पेश होकर उसने प्रार्थना पत्र दिया। ऐताब ने बताया था कि जिस ट्रेन में उसकी हत्या किए जाने बात कही जा रही है वह तो उस ट्रेन में था ही नहीं। वह दिल्ली में सिलाई-कढ़ाई का काम सीखने गया था।

वहां से काम करने वह गुजरात चला गया था। उसके पास मोबाइल नहीं है, जिसकी वजह से परिजनों से संपर्क नहीं हो सका। मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने नरेंद्र कुमार दुबे को हत्या के अपराध से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में लिखा है कि वर्तमान निर्णय में नरेंद्र कुमार दुबे को हत्या के आरोप से दोषमुक्त किया गया है क्योंकि जिस व्यक्ति की हत्या की बावत विचारण चल रहा है, वह व्यक्ति जिंदा है।

इसका मतलब यह है कि वास्तव में नरेंद्र कुमार दुबे के की ओर से जिस व्यक्ति को मारपीट कर चलती ट्रेन से फेंका गया था वह कोई और है। अगर उस अज्ञात व्यक्ति के घरवाले नरेंद्र पर कोई मुकदमा करना चाहते हैं तो नरेंद्र पर मुकदमा चलाया जाएगा, लेकिन इस आरोप से उसे बरी किया जाता है। हालांकि इस दौरान लगभग ढाई साल से नरेंद्र इस केस में जेल में है, अब उसे बरी करने का आदेश दिया गया है। शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा ने कोर्ट को बताया कि वह कोई तो था, जिसे मारपीट कर ट्रेन से फेंका गया था। उनके तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिस व्यक्ति को ट्रेन से फेंका गया था उस पर मोबाइल चोरी का आरोप था।

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