डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार का बड़ा एक्शन, 9,400 WhatsApp अकाउंट बंद
स्वदेशी टाइम्स, डिजिटल अरेस्ट स्कैम: देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) इस मामले में टेलीकॉम कंपनियों, आरबीआई, टेक प्लेटफॉर्म्स और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिपोर्ट में दी गई है।
सोशल मीडिया और अकाउंट्स पर कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप ने पिछले कुछ हफ्तों में करीब 9,400 ऐसे अकाउंट्स को बंद किया है जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े थे। इसके अलावा ऐसे अकाउंट्स की पहचान की जा रही है जो पुलिस या सरकारी प्रतीकों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
संदिग्ध कॉल्स पर नई सुरक्षा
व्हाट्सऐप जल्द ही ऐसे फीचर्स लाने की तैयारी में है, जिससे यूजर्स को किसी अनजान या संदिग्ध नंबर से कॉल आने पर चेतावनी मिलेगी। साथ ही, फर्जी पहचान छिपाने के लिए संदिग्ध प्रोफाइल तस्वीरें भी ऑटोमैटिक ब्लर की जा सकती हैं।
फर्जी सिम पर सख्ती
टेलीकॉम विभाग और कंपनियों ने मिलकर एक नई व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत संदिग्ध सिम कार्ड की पहचान होते ही 2–3 घंटे के भीतर उसे ब्लॉक करने का लक्ष्य रखा गया है।
बड़े मामलों की जांच
सीबीआई अब 10 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी वाले मामलों की जांच करेगी। हाल ही में कुछ बड़े मामलों को फिर से दर्ज किया गया है, जिनमें दिल्ली का एक बड़ा केस भी शामिल है।
नई बायोमेट्रिक व्यवस्था की योजना
सरकार एक नई बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लाने पर काम कर रही है, जिससे सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा सके। इसे दिसंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य है।
बैंकिंग सिस्टम में बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को संदिग्ध लेन-देन तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि “मनी म्यूल” नेटवर्क को खत्म किया जा सके।
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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और सभी एजेंसियों को मिलकर एक मजबूत ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था भी शामिल है।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि टेलीकॉम कंपनियों पर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।
