Uttrakhand में BJP का मिशन-2027 शुरू, हर बूथ के लिए अलग रणनीति

स्वदेशी टाइम्स, देहरादून : उत्तराखंड में भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रदेश संगठन में बदलाव और सुधार की प्रक्रिया के बाद पार्टी नवरात्र से बूथ स्तर पर चुनावी गतिविधियां तेज करने जा रही है। भाजपा की रणनीति का केंद्र राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों के बूथ होंगे, जिनके लिए अलग-अलग चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

इस रणनीति को जमीन पर उतारने की शुरुआत 13 और 14 अक्टूबर को काशीपुर में होने वाली कार्यशाला से होगी। इसके बाद विधानसभा क्षेत्रवार नियुक्त विस्तारक और प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होकर बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगे।

हर बूथ का अलग चुनावी आकलन करेगी भाजपा

भाजपा ने इस बार सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक जैसी रणनीति अपनाने के बजाय प्रत्येक बूथ की स्थिति के आधार पर चुनावी योजना बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए विधानसभा क्षेत्रवार विस्तारकों और प्रभारियों की सूची तैयार कर ली गई है।

काशीपुर में होने वाली कार्यशाला के बाद विस्तारक संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय होंगे। उनकी जिम्मेदारी केवल संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक बूथ की चुनावी स्थिति का विस्तृत आकलन करना भी होगा।

विस्तारकों को यह जानकारी जुटानी होगी कि किन बूथों पर भाजपा की स्थिति मजबूत है, कहां पिछली बार जीत का अंतर कम रहा, किन बूथों पर हार के अंतर को कम करने की गुंजाइश है और कहां संगठन की मौजूदगी कागजों की तुलना में जमीन पर कमजोर है। इस आकलन के आधार पर संगठन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

स्थानीय मुद्दों के आधार पर बनेगा चुनावी ब्लूप्रिंट

भाजपा की बूथवार रणनीति में स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों को भी महत्व दिया जाएगा। पार्टी के सामने किसी बूथ पर जातीय-सामाजिक समीकरण चुनौती हो सकते हैं, तो किसी दूसरे क्षेत्र में स्थानीय समस्याएं चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की योजना है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसके अलावा, बूथवार आकलन में यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं और कहां महिला मतदाताओं की भागीदारी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग बूथों के लिए चुनावी योजना तैयार की जाएगी।

शक्ति केंद्रों से होगी बूथों की निगरानी

भाजपा पहले चुनावी प्रबंधन में मंडल को प्रमुख इकाई के रूप में इस्तेमाल करती रही है। एक मंडल के अंतर्गत कई बूथ होने के कारण प्रत्येक बूथ की नियमित निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अब पार्टी शक्ति केंद्रों के माध्यम से बूथ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है। एक शक्ति केंद्र के अंतर्गत करीब पांच से छह बूथ आते हैं। इससे कम संख्या में बूथों पर ध्यान केंद्रित करने, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बढ़ाने और स्थानीय स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस व्यवस्था के तहत बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारियों की निगरानी आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा।

युवा और महिला मतदाताओं के लिए अलग रणनीति

भाजपा की प्रस्तावित बूथवार योजना में युवा और महिला मतदाताओं को भी अलग महत्व दिया जाएगा। युवा मतदाताओं की संख्या अधिक होने वाले बूथों पर रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और डिजिटल संवाद जैसे विषयों पर फोकस करने की तैयारी है।

वहीं, महिला मतदाताओं की अधिकता वाले बूथों पर स्वास्थ्य, सुरक्षा, आजीविका और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

पार्टी की योजना के अनुसार, स्थानीय परिस्थितियों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर गतिविधियां तय की जाएंगी।

70 विधानसभा सीटों पर बूथ प्रबंधन पर रहेगा जोर

उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटों के लिए भाजपा की मिशन-2027 रणनीति का मुख्य आधार बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति का आकलन और उसके अनुसार तैयारी करना है। 13 और 14 अक्टूबर को काशीपुर में होने वाली कार्यशाला के बाद विस्तारकों की सक्रियता से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

पार्टी की रणनीति में मजबूत बूथों पर स्थिति बनाए रखने के साथ कमजोर बूथों की कमियों को पहचानने और स्थानीय मुद्दों के अनुसार चुनावी तैयारी करने पर जोर रहेगा। हालांकि, इस रणनीति का वास्तविक असर आगामी विधानसभा चुनाव में ही स्पष्ट होगा।