Tungnath धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, मक्कूमठ के लिए रवाना हुई बाबा की उत्सव डोली
स्वदेशी टाइम्स , रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंचकेदारों में शामिल तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार, 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सुबह से ही मंदिर परिसर में कपाट बंद होने की धार्मिक तैयारियां शुरू हो गई थीं। वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट बंद किए गए। इसी के साथ हिमालय की ऊंची चोटियों पर स्थित तुंगनाथ धाम में इस वर्ष की नियमित पूजा-अर्चना का समापन हो गया।
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई। अब आगामी छह महीनों तक श्रद्धालु मक्कूमठ स्थित मार्कंडेय मंदिर में बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर सकेंगे। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे और बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तुंगनाथ धाम
समुद्रतल से करीब 3,680 मीटर यानी 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर चंद्रशिला पर्वत की तलहटी में बसा है। यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक महत्व के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजे जाने वाले भगवान तुंगनाथ के मंदिर में कपाट बंद होने के दौरान भी भक्तों की अच्छी खासी भीड़ रही।
मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और आवश्यक अनुष्ठान संपन्न कराए। कपाट बंद होने के दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा तुंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से बाबा को विदाई दी और अगले यात्रा सीजन में दोबारा दर्शन करने की कामना की।
तीन पड़ावों से होकर मक्कूमठ पहुंचेगी बाबा की डोली
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली की शीतकालीन यात्रा शुरू हो गई है। इस यात्रा के दौरान डोली तीन अलग-अलग पड़ावों से होते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी।
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6 नवंबर: कपाट बंद होने के बाद डोली चोपता पहुंचेगी, जहां रात्रि प्रवास होगा।
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7 नवंबर: डोली भनकुंड पहुंचेगी और यहां रात्रि विश्राम करेगी।
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8 नवंबर: डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ पहुंचेगी।
इसके बाद मक्कूमठ में भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। शीतकाल के दौरान श्रद्धालु यहीं पहुंचकर बाबा के दर्शन और पूजा कर सकेंगे।
पंचकेदारों में विशेष महत्व रखता है तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ धाम हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। इसे पंचकेदारों में तीसरे केदार के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सौंदर्य के चलते हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
2019, 2025 और 2026 में 6 नवंबर को बंद हुए कपाट
इस वर्ष तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ एक खास संयोग भी देखने को मिला। पिछले कुछ वर्षों में तीन बार मंदिर के कपाट एक ही तारीख यानी 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हुए हैं। इससे पहले वर्ष 2019 और 2025 में भी 6 नवंबर को ही कपाट बंद किए गए थे। अब वर्ष 2026 में भी इसी तारीख को कपाट बंद होने से यह संयोग एक बार फिर चर्चा में है।
अब शीतकाल के दौरान तुंगनाथ धाम के बजाय मक्कूमठ में ही बाबा तुंगनाथ की पूजा-अर्चना होगी। श्रद्धालु अगले छह महीनों तक शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे।