Jorhat, में AN-32 विमान हादसा: भारतीय वायुसेना के 5 जवानों ने ड्यूटी के दौरान दिया सर्वोच्च बलिदान
जानकारी के अनुसार, विमान जोरहाट एयरबेस पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। लैंडिंग के तुरंत बाद विमान में आग लग गई, जिससे एयरबेस पर आपात स्थिति पैदा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और बचाव दल मौके पर पहुंचे तथा आग पर काबू पाने के लिए तत्काल अभियान शुरू किया गया।
दुर्घटना पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देश इन वीर जवानों की सेवा, साहस और समर्पण को हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा। साथ ही उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
भारतीय वायुसेना ने हादसे के कारणों की जांच के लिए ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ के गठन का आदेश दिया है। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि लैंडिंग के दौरान विमान में आग लगने और दुर्घटना होने के पीछे क्या कारण रहे।
AN-32 विमान भारतीय वायुसेना के प्रमुख परिवहन विमानों में से एक है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया था। यह विमान विशेष रूप से दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों और रसद सामग्री की आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी क्षमता छोटे और सीमित रनवे पर भी संचालन की रही है, जिसके कारण पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों में इसका व्यापक इस्तेमाल होता रहा है।
हालांकि AN-32 विमानों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला एक AN-32 विमान अरुणाचल प्रदेश के मेचुका क्षेत्र के लिए रवाना होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं वर्ष 2016 में चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा एक अन्य AN-32 विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया था, जिसमें 29 लोग सवार थे।
ताजा हादसे के बाद एक बार फिर AN-32 विमानों की परिचालन सुरक्षा और उनके आधुनिकीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल वायुसेना की जांच टीम दुर्घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
