Adi Kailash मैराथन में दौड़ेंगे करीब 1100 धावक, विंटर टूरिज्म और सीमांत गांवों में रोजगार बढ़ाने पर जोर

स्वदेशीटाइम्स , देहरादून : उत्तराखंड के सीमांत गांवों में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आदि कैलाश परिक्रमा रन को हर साल आयोजित किया जाएगा। इस बार पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में होने वाले आयोजन में करीब 1100 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में अल्ट्रा मैराथन, मैराथन, हाफ मैराथन, छोटी दूरी की दौड़ और माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिताएं होंगी। सरकार का उद्देश्य साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सर्दियों में भी पर्यटकों को सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

उत्तराखंड में पर्यटन को चारधाम यात्रा और गर्मियों के पर्यटन तक सीमित रखने के बजाय अब शीतकालीन पर्यटन को भी विस्तार देने की तैयारी है। इसी दिशा में पर्यटन विभाग ने आदि कैलाश परिक्रमा रन को अपने वार्षिक कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बनाया है।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर पिछले वर्ष आयोजित आदि कैलाश और नीती घाटी की अल्ट्रा मैराथन को अब नियमित रूप से हर साल कराया जाएगा। सरकार इन आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाकर सीमांत क्षेत्रों को साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना चाहती है।

पिछले साल 750, इस बार करीब 1100 प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण

आदि कैलाश मैराथन के प्रति धावकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, पिछले वर्ष इस आयोजन में करीब 750 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस बार पंजीकरण कराने वालों की संख्या लगभग 1100 तक पहुंच गई है।

प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन विभाग ने फिलहाल पंजीकरण बंद कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय क्षेत्र में उपलब्ध आवास और अन्य सुविधाओं की क्षमता को ध्यान में रखकर लिया गया है।

धावकों के ठहरने, भोजन और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करना आयोजन का अहम हिस्सा है। फिलहाल होमस्टे, होटल और गेस्ट हाउस में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार ही प्रतिभागियों की संख्या तय की गई है। आने वाले वर्षों में स्थानीय स्तर पर आवासीय सुविधाओं का विस्तार होने के साथ प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

4500 मीटर की ऊंचाई पर होगी रोमांचक दौड़

आदि कैलाश परिक्रमा रन की खासियत हिमालय की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और अधिक ऊंचाई पर होने वाली प्रतियोगिताएं हैं। आयोजन के दौरान धावकों को कम तापमान, कठिन रास्तों और ऊंचाई से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

कार्यक्रम के अनुसार, 23 अक्टूबर को गुंजी में शाम पांच बजे उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। 24 अक्टूबर को सुबह छह बजे करीब 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन को जौलिंगकोंग से और 42 किलोमीटर की मैराथन को गुंजी से रवाना किया जाएगा।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 24 अक्टूबर को मैराथन का शुभारंभ करेंगे। करीब 4500 मीटर की ऊंचाई वाले आदि कैलाश क्षेत्र से जुड़ा यह आयोजन धावकों की शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा लेगा।

इसी वजह से इसे केवल खेल प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

70, 42, 21, 10 और 5 किलोमीटर की दौड़ होंगी आयोजित

आयोजन में अलग-अलग आयु और क्षमता वाले प्रतिभागियों को ध्यान में रखते हुए कई श्रेणियां रखी गई हैं। इनमें 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन, 42 किलोमीटर की मैराथन, 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन और 10 तथा 5 किलोमीटर की दौड़ शामिल हैं। इसके अलावा 25 और 50 किलोमीटर की माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम के मुताबिक, 24 अक्टूबर की शाम गुंजी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। 25 अक्टूबर को सुबह सात बजे 21, 10 और 5 किलोमीटर की दौड़ शुरू होगी। इसी दिन सुबह 11 बजे रनिंग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। शाम को एक अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

26 अक्टूबर को सुबह सात बजे 50 और 25 किलोमीटर की माउंटेन बाइकिंग रेस शुरू होगी। सुबह 11 बजे एमटीबी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।

इस आयोजन को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और भारतीय सेना का भी सहयोग है। भारतीय एथलेटिक्स से मान्यता मिलने को भी आयोजन की पहचान मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

विंटर टूरिज्म से सीमांत गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, आदि कैलाश और नीती घाटी में अल्ट्रा मैराथन आयोजित करने का उद्देश्य केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सीमांत गांवों में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर तैयार करना भी है।

आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन का सीजन सीमित रहता है। इसका असर स्थानीय कारोबार और रोजगार पर पड़ता है। सरकार चाहती है कि साहसिक खेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विशेष पर्यटन आयोजनों के जरिए सर्दियों में भी पर्यटकों को इन क्षेत्रों तक लाया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को सालभर आजीविका के साधन मिल सकें।

पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होमस्टे, होटल और गेस्ट हाउस संचालकों के साथ टैक्सी चालकों, गाइडों, दुकानदारों और अन्य सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना भी है।

वाइब्रेंट विलेज योजना को मिलेगा बढ़ावा

सीमांत गांवों में आबादी बनाए रखना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि आदि कैलाश और नीती घाटी में होने वाले ऐसे आयोजन इस दिशा में मददगार साबित हो सकते हैं।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इन आयोजनों से गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकेंगे। इससे केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के उद्देश्यों को भी आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्यटन आयोजनों के साथ सड़क, संचार, स्वास्थ्य, आवास और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी होगा। फिलहाल करीब 1100 प्रतिभागियों का पंजीकरण इस आयोजन के प्रति बढ़ते आकर्षण का संकेत है।

अब पर्यटन विभाग के सामने चुनौती आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के साथ इस उत्साह को बरकरार रखने की है, ताकि आदि कैलाश और नीती घाटी आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के प्रमुख साहसिक पर्यटन केंद्रों के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकें।