Uttrakhand के मान्यता प्राप्त मदरसों में अब रविवार को होगी छुट्टी, शुक्रवार को अवकाश खत्म करने पर गरमाई सियासत

स्वदेशी टाइम्स , देहरादून : Uttrakhand  में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में समान शैक्षिक व्यवस्था लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम उठाया है। प्रदेश में स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार यानी जुमे के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि सभी शिक्षण संस्थानों में समान शैक्षिक नियम लागू करने और बच्चों को आधुनिक व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की जा रही है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर मदरसों में पढ़ने वाले कुछ छात्र शुक्रवार को नमाज की तैयारी और धार्मिक गतिविधियों के लिए आधे दिन की छुट्टी की मांग कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने सरकार के निर्णय को ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर प्रदेश में सियासी बहस तेज हो गई है।

मदरसों में शुक्रवार के बजाय रविवार को होगा साप्ताहिक अवकाश

उत्तराखंड सरकार ने स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार को मिलने वाले साप्ताहिक अवकाश की जगह रविवार को छुट्टी रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार का तर्क है कि प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होनी चाहिए।

सरकार का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकें और भविष्य में बेहतर शैक्षिक एवं रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त मदरसों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इनमें साप्ताहिक अवकाश और शैक्षिक संचालन से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रदेश में लागू हुई। इसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप संचालित करने की व्यवस्था की गई है।

इसमें मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समेत विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान शामिल हैं। नई व्यवस्था के तहत पहले से मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्कूल के रूप में मान्यता के लिए आवेदन करना पड़ रहा है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में पहले मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। नई व्यवस्था के तहत अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं।

देहरादून, हरिद्वार समेत चार जिलों में मिली मान्यता

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है। इनमें जिलावार स्थिति इस प्रकार है:

  • देहरादून: 6 संस्थान

  • हरिद्वार: 44 संस्थान

  • नैनीताल: 2 संस्थान

  • ऊधम सिंह नगर: 24 संस्थान

डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की ओर से तय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। साप्ताहिक अवकाश से लेकर पढ़ाई के संचालन तक की व्यवस्थाएं भी इन्हीं नियमों के दायरे में आती हैं।

शुक्रवार को हाफ डे की मांग कर रहे छात्र

दूसरी ओर, मदरसों में पढ़ने वाले कुछ छात्रों का कहना है कि शुक्रवार को उन्हें आधे दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए। छात्रों के मुताबिक, जुमे की नमाज के लिए तैयारी करने और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है।

छात्रों की मांग है कि शुक्रवार को पूरी तरह साप्ताहिक अवकाश न सही, लेकिन नमाज की तैयारी के लिए आधे दिन की छुट्टी की व्यवस्था की जाए। हालांकि, इस मांग को लेकर सरकार की ओर से किसी नए निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

मदरसों में साप्ताहिक अवकाश बदलने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने भी आपत्ति जताई है। पार्टी इसे ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देख रही है। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के फैसलों पर धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

वहीं, सरकार की ओर से इस व्यवस्था के पीछे समान शैक्षिक नियम लागू करने और बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का तर्क दिया जा रहा है। ऐसे में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।

नई व्यवस्था के बीच आगे क्या?

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू होने के बाद संस्थानों की मान्यता और शैक्षिक संचालन के नियमों में बदलाव किया जा रहा है। अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है और 114 के आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

फिलहाल, मान्यता प्राप्त मदरसों में रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देशों के बीच शुक्रवार को हाफ डे की मांग भी उठ रही है। इस मुद्दे पर सरकार के अगले कदम और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।