फर्जी गेमिंग व बेटिंग एप से ठगी कर वाले गिरोह का भंडाफोड़, देश के 15 राज्यों में लोगों को बनाया शिकार, दो गिरफ्तार

स्वदेशी टाइम्स, बरेली : फर्जी बेटिंग और गेमिंग एप के जरिए ठगी कर वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। गिरोह के दो सदस्यों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जबकि गिरोह का सरगना भागने में कामयाब रहा। जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। गिरोह ने देश के करीब 15 राज्यों में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया।

बता दें कि आशुतोष सिटी में कमरा किराए पर लेकर फर्जी कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था। जहां काम करने वाले गिरोह के सदस्य लोगों को कॉल करते व उनकी बताई ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग एप पर पैसा लगाने का लालच दिया करते। इसके लिए आरोपियों ने महादेव, महाकाल नाम का फर्जी बेटिंग एप भी बना रखा था। पुलिस को इस गिरोह की भनक उस वक्त लगी जब एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल) दर्ज एक शिकायत से संबंधित मोबाइल नंबर और पीड़ित के खाते में जिस ट्रांजेक्शन आईपी के जरिए सेंधमारी की गई थी उसकी जांच की जा रही थी। ट्रांजेक्शन आईपी से मिले मोबाइल नंबर की लोकेशन आशुतोष सिटी में मिली। लिहाजा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आशुतोष सिटी के मकान में जाकर छापामार कार्रवाई की।

मकान में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
मकान में छापामारी के दौरान पुलिस को एक फर्जी कॉल सेंटर चलता मिला। मौके से नवाबगंज के आदर्शनगर निवासी सूर्याभान पटेल और भुता थाना क्षेत्र के ग्राम कैमुआं कला निवासी विनीत को गिरफ्तार किया गया। गिरोह का सरगना शिवम कुमार भागने में कामयाब रहा। पुलिस ने इनके पास से बड़ी तादाद में साइबर क्राइम के इस्तेमाल में आने वाला सामान भी बरामद किया। जिसमें सात मोबाइल, 3 वाईफाई राउटर, 7 डिजिटल क्यू आर डिवाइस, 1 क्यू आर कोड, 12 सिम कार्ड, रेपर, 7 चेकबुक, 5 बैंक पासबुक, 13 डेबिट कार्ड आदि मिला।

देश के 15 राज्यों में लोगों को बनाया शिकार
पुलिस पकड़े गए आरोपियों से जो जानकारी जुटाई वो हैरान करने वाली है। इन ठगों के तार देश के 15 राज्यों में अब तक जुड़े पाए गए। जिसमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडू, तेलंगाना, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, गुजरात, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अब तक लोगों को अपना शिकार बनाया। पुलिस अब इनका नेटवर्क खंगालने में जुटी है।

ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर करते हैं ठगी
एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया कि गिरोह बेहद शातिर ढंग से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। उन्होंने बताया कि पहले ये लोगों को फोन कर उनके बताए गेमिंग एप में पैसा निवेश करने लिए उकसाते हैं। उनको अच्छा रिटर्न मिलने का लालच दिया जाता है। जब पीड़ित राजी हो जाता है तो उसको फर्जी गेमिंग और बेटिंग एप का यूआरएल भेजकर बैंक खाते का क्यूआर भेजते हैं। इसके बाद उनका पैसा अलग-अलग दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिया जाता है। बाद में पीड़ित को गेमिंग और बेटिंग एप में पैसा हार जाने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

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