आयरलैंड में बढ़ रहे नस्लीय हमले, भारतीय मूल के शख्स पर हमला कर तोड़ी गाल की हड्डी
प्रयाग भारत, दिल्ली; आयरलैंड में नस्लवादी हमले रूकने के नाम नहीं ले रहे हैं. भारतीय मूल के एक एंटरप्रेन्योर ने कहा है कि डबलिन में किशोरों के एक समूह ने उसे बेरहमी से पीटा है. संतोष यादव आयरिश शहर लेटरकेनी में वाईएसएआर लैब और टेक्नोलॉजी गेटवे में एक सीनियर डेटा साइंटिस्ट हैं. उन्होंने अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखा है कि उन्हें सिर, चेहरे, गर्दन, छाती, हाथ और पैरों पर लगातार पीटा गया और खून बहता हुआ फुटपाथ पर छोड़ दिया गया.
एक लंबे लिंक्डइन पोस्ट में, संतोष यादव ने कहा कि उन पर हमला कोई अकेली हुई (आइसोलेटेड) घटना नहीं है. उन्होंने दावा किया कि इस यूरोपीय देश में इस तरह के “बिना उकसावे के” टारगेट करने नस्लीय हमले आम होता जा रहे हैं. उन्होंने लिखा, “रात का खाना खाने के बाद, मैं अपने अपार्टमेंट के पास टहल रहा था जब छह किशोरों के एक समूह ने मुझ पर पीछे से हमला किया. उन्होंने मेरा चश्मा छीन लिया, उन्हें तोड़ दिया, और फिर मेरे सिर, चेहरे, गर्दन, छाती, हाथ और पैरों पर लगातार पीटा- मुझे फुटपाथ पर खून से लथपथ छोड़ दिया. मैं गार्डाई (आयरलैंड की पुलिस) को फोन करने में कामयाब रहा, और एक एम्बुलेंस मुझे ब्लैंचर्डस्टाउन अस्पताल ले गई. मेडिकल टीम ने पुष्टि की कि मेरे गाल की हड्डी टूट गई है, और मुझे अब एक्सपर्ट की देखभाल के लिए भेजा गया है.”
आयरलैंड में नस्लीय हमले के इस नए आरोप से एक हफ्ते पहले एक भी भारतीय व्यक्ति पर हमला किया गया था. उस व्यक्ति पर बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार का झूठा आरोप लगाने के बाद डबलिन में भीड़ द्वारा क्रूरतापूर्वक हमला किया गया था. संतोष यादव ने दावा किया है कि भले पूरे डबलिन में अल्पसंख्यकों पर ऐसे हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार और पुलिस अधिकारी चुप हैं और अपराधियों को खुली छूट दे रखी है.
उन्होंने लिखा है, “दरअसल पूरे डबलिन में बसों, हाउसिंग एस्टेट और सार्वजनिक सड़कों पर भारतीय व्यक्तियों और अन्य अल्पसंख्यकों पर नस्लवादी हमले बढ़ रहे हैं. फिर भी सरकार चुप है. इन अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. वे खुलेआम घूम रहे हैं और फिर से हमला करने के लिए उत्साहित हैं.” अधिकारियों से नस्लीय रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करते हुए, संतोष यादव ने पोस्ट में आयरलैंड सरकार, डबलिन में भारतीय दूतावास, भारतीय विदेश मंत्रालय और अखिलेश मिश्रा सहित कई सरकारी एजेंसियों को टैग किया.
