मौसम ने ली करवट, मैदान में बारिश, केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में बर्फबारी

स्वदेशी टाइम्स, उत्तराखंड : केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम में हुई ताजा बर्फबारी ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया है। ऊंची पहाड़ियों से लेकर मंदिर परिसर तक हर ओर बर्फ की मोटी परत नजर आ रही है।  तापमान में गिरावट के चलते लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।

उत्तराखंड में मौसम ने करवट ली और मैदान में बारिश की साथ ही केदारनाथ, यमुनोत्री धाम सहित ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। दोनों धामों में बर्फ से ढके पहाड़ और रास्तों के दृश्य बेहद मनमोहक नजर आए। लगातार हो रही बर्फबारी के चलते ठंड में इजाफा हो गया है। और लोगों को गर्म कपड़े निकालने पड़े।

लगातार हो रही बर्फबारी के कारण मौसम बेहद सर्द हो गया है। वहीं, देहरादून समेत मैदानी क्षेत्रों में रातभर हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। जिलेभर में बुधवार सुबह से ठंडक बढ़ गई और लोगों को फिर से स्वेटर और जैकेट पहननी पड़ी। बारिश के कारण दफ्तर और बाजार जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी, जिससे जनजीवन प्रभावित रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून का न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम है। मसूरी और अन्य पहाड़ी इलाकों में तापमान और नीचे चला गया है। विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंहनगर में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य जिलों में यलो अलर्ट है। 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। 

पिछले 24 घंटे में चकराता में 36.3 मिमी, मसूरी में 32.4 मिमी, कोटद्वार में 32 मिमी और कीर्तिनगर में 30 मिमी बारिश दर्ज की गई। कोटी में सबसे अधिक 57 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि नागथात और धनोल्टी में भी अच्छी बारिश हुई।
Snowfall at Kedarnath Dham and Yamunotri Dham Uttarakhand Weather Updates Snowfall Photos

इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बादल छाए रहे और बारिश हो रही है। इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी हवाओं ने तापमान में और गिरावट ला दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो यह अरब सागर और भूमध्यसागर क्षेत्र से नमी लेकर आता है।

यही नमी बादलों का निर्माण करती है और बारिश का कारण बनती है। इसके चलते सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक नहीं पहुंच पातीं जिससे तापमान में कमी आती है।

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