अब केरल का नाम बदलकर होगा केरलम, केंद्रीय कैबिनेट ने 12,236 करोड़ के विभिन्न प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी
स्वदेशी टाइम्स, नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नए पीएम कार्यालय सेवा तीर्थ में हुई पहली कैबिनेट बैठक में हुए फैसलों की जानकारी दी।
- प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को बताया कि देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू को पहली चार कैबिनेट बैठकें राष्ट्रपति भवन में करनी पड़ीं थी। प्रधानमंत्री ने बताया कि साउथ ब्लॉक के कार्यालय में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के पहले चार बड़े युद्धों के लिए रणनीति भी साउथ ब्लॉक के वार रूम में बनाई गई।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी साप्ताहिक कैबिनेट बैठकों में सिर्फ एजेंडा पर ही बात नहीं करते बल्कि पूरे सप्ताह चर्चा में रहने वाली अहम बातों पर भी चर्चा करते हैं और मंत्रियों से भी फीडबैक लेते हैं।
अच्छी खबर की जाएगी साझा
- इस दौरान प्रधानमंत्री उम्मीद करते हैं कि सभी लोग कुछ न कुछ अच्छी खबर भी बताएं, फिर चाहे वो मंत्रालय से जुड़ी हो या फिर व्यक्तिगत।
- सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक में भी उम्मीद की जा रही है कि मंत्री अच्छी खबर साझा करेंगे, जिससे बैठक में सकारात्मक माहौल बने।
- प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई इस पहल का मकसद कैबिनेट के सभी सदस्यों को प्रेरित करना है।
- कैबिनेट सचिवालय, जो पहले राष्ट्रपति भवन में स्थित था, उसे भी सेवा तीर्थ में शिफ्ट कर दिया गया है।
- सेवा तीर्थ के नजदीक ही नया प्रधानमंत्री आवास भी बन रहा है।
- निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नया संसद भवन, पीएमओ, प्रधानमंत्री कार्यालय और सभी मंत्रियों के कार्यालय भी आसपास हो जाएंगे, जिससे वीवीआईपी मूवमेंट के चलते होने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग समझौतों को मंजूरी दे सकती है कैबिनेट
आज हो रही कैबिनेट बैठक में जर्मनी और कनाडा के साथ दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग के समझौतों को मंजूरी दी जा सकती है। कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी कर रहे हैं। इन समझौतों का मकसद भारत की रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न देशों के साथ मजबूत करना और आधुनिक तकनीक के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
जर्मनी के साथ समझौते के तहत दोनों देश जर्मनी संयुक्त तौर पर दुर्लभ खनिज का अन्वेषण करेंगे, साथ ही तकनीक ट्रांसफर भी करेंगे। भारत, आत्मनिर्भर भारत के तहत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दुर्लभ खनिजों जैसे लीथियम, कोबाल्ट, निकल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है।
