कपसाड़ में हाई अलर्ट के बीच चंद्रशेखर टोल पहुंचे, पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक
स्वदेशी टाइम्स, मेरठ : मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या और बेटी रुबी के अपहरण के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं को टोल पर रोका गया, गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। वहीं नगीना सांसद भी पुलिस को चकमा देकर टोल पर पहुंच गए।
कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रुबी के अपहरण के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। एक ओर अपहृत बेटी की सलामती को लेकर पीड़ित परिवार बदहवास नजर आया, तो दूसरी ओर गांव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। वहीं गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। गांव को पूरी तरह सील किया गया है। पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे नेताओं को बाहर ही रोका जा रहा है।
पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी पुलिस को चकमा देकर कार्यकर्ताओं संग बाइक पर सिवाया टोल प्लाजा पहुंच गए। यहां उन्हें कार्यकर्ताओं ने घेरे रखा। वहीं पुलिस प्रशासन को सूचना मिलते ही उन्हें टोल प्लाजा पर रोक लिया गया।
दोपहर के समय पीड़ित परिवार से मिलने AIMIM के मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष इमरान काशमी जब कार्यकर्ताओं के साथ कपसाड़ जाने के लिए निकले, तो पुलिस ने उन्हें सलावा चौराहे पर रोक लिया। इससे नाराज AIMIM कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
एकता क्रांति मिशन के पदाधिकारियों ने दिया धरना
सलावा चौराहे पर कश्यप एकता क्रांति मिशन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी प्रदर्शन के लिए पहुंचे। पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर संगठन के कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी भी हुई।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान पीड़ित परिवार से मिलने कपसाड़ गांव जा रही थीं। जब सीमा प्रधान अपने समर्थकों के साथ सिवाया टोल प्लाज़ा पहुंचीं, तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
सीमा प्रधान ने पुलिस पर धक्का-मुक्की का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्वक पीड़ित परिवार से मिलने जा रही थीं, लेकिन पुलिस ने जबरन रोका। इसके बाद वह अपने समर्थकों के साथ टोल प्लाजा पर ही धरने पर बैठ गईं।

