डबल मर्डर केस: पूर्व MLA की जमानत याचिका रद्द, कोर्ट ने 14 दिनों में समर्पण का निर्देश दिया

स्वदेशी टाइम्स, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक पिन्नेली राम कृष्णा रेड्डी और उनके भाई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आरोपियों की असाधारण पहुंच पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही इसे अदालत ने जांच में दखल बताया और दोनों को दो सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया।

दोहरे हत्याकांड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक पिन्नेली राम कृष्णा रेड्डी और उनके भाई पिन्नेली वेंकटरामी रेड्डी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों के असाधारण पहुंच पर सवाल उठाए। साथ ही कहा कि जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए बयानों की प्रतियां आरोपियों तक कैसे पहुंचीं। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि यह खुद एक संकेत है कि कहीं न कहीं साजिश की गंध आती है।

अदालत ने साफ कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से पहले ही जांच से जुड़े दस्तावेजों का आरोपियों तक पहुंचना बेहद चिंताजनक है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि आरोपियों को जांच की अंतरंग जानकारी कैसे मिली। अदालत ने इसे जांच में सीधा दखल बताया और कहा कि यह तरीका स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करें।
ये ‘साजिश’ के संकेत हैं- सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि जिस तरीके से दस्तावेज हासिल किए गए, वह बताता है कि जांच प्रभावित करने की कोशिश हुई है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि आरोपियों ने जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए बयानों की प्रतियां अदालत में दाखिल की हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि ऐसी प्रतियां उन्हें कैसे मिलीं, जबकि केस डायरी कभी भी सार्वजनिक नहीं की जाती।
राजनीतिक बदले की बात कह रहे आरोपी
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने उनकी दलील पर संतोष नहीं जताया और कहा कि आरोपियों की पहुंच चौकाने वाली”है। आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने भी चिंता जताते हुए कहा कि जांच महत्वपूर्ण चरण में है और ऐसे में जमानत मिलने से जांच प्रभावित होगी।

हाई कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत से किया था इनकार
इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अगस्त में अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि दोनों आरोपी जे. वेंकटेश्वरलु और जे. कोटेश्वर राव की मई में हुई हत्या के मुख्य षड्यंत्रकारी हैं। हाई कोर्ट ने माना था कि इस समय जमानत मिलने से जांच बाधित होगी। यही आदेश सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पीड़ितों के परिवार ने जताई राहत
दोहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राहत जताई है। उनका कहना है कि आरोपियों की राजनीतिक पहुंच के कारण अब तक जांच के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उम्मीद है कि जांच बिना दबाव के पूरी हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने मामले की दिशा और गंभीरता को साफ कर दिया है।

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