Dehradun में एलिवेटेड रोड के नए अलाइनमेंट पर विवाद, 300 से ज्यादा घरों पर संकट का दावा; विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे लोग
स्वदेशी टाइम्स , देहरादून : राजधानी देहरादून में मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के नए अलाइनमेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बदले गए रूट की वजह से 300 से अधिक घर प्रभावित हो सकते हैं और 1,200 से ज्यादा लोगों के सामने अपने आशियाने खोने का खतरा पैदा हो गया है। परियोजना के विरोध में प्रभावित परिवारों ने 14 अक्टूबर से विधानसभा के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कहना है कि पुराने विकल्पों पर विचार करने के दौरान बड़ी संख्या में मकानों और अन्य संरचनाओं के प्रभावित होने की आशंका सामने आई थी। इसलिए रेलवे लाइन के समानांतर उपलब्ध जमीन पर नए अलाइनमेंट की संभावना तलाशने के बाद कम नुकसान वाले विकल्प को चुना गया।
अब इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और संबंधित विभाग के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। जहां प्रभावित परिवार पुराने प्रस्तावित रूट पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं, वहीं NHAI का कहना है कि सर्वे के बाद प्रभावित संपत्तियों का आकलन किया जाएगा और नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मोहकमपुर से आशारोड़ी तक प्रस्तावित है एलिवेटेड रोड
देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को कम करने के उद्देश्य से मोहकमपुर से आशारोड़ी तक सड़क परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक रेलवे लाइन के समानांतर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में सड़क को मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के ऊपर से ले जाने का विकल्प था, लेकिन बाद में अलाइनमेंट बदल दिया गया। उनका आरोप है कि नए रूट के कारण अब आवासीय क्षेत्र के मकान और जमीन परियोजना की जद में आ रहे हैं।
लोगों के मुताबिक, उन्हें परियोजना की जानकारी उस समय मिली, जब उनके घरों पर निशान लगाए जाने लगे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने आपस में संपर्क कर संघर्ष समिति बनाई और अपने घरों को बचाने के लिए विरोध शुरू कर दिया।
घरों पर निशान लगने के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
स्थानीय निवासियों के अनुसार, नए अलाइनमेंट के तहत मकानों पर निशान लगाए जाने के बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई। कई परिवारों को आशंका है कि सड़क निर्माण के लिए उनकी संपत्ति का कुछ हिस्सा या पूरा मकान प्रभावित हो सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित लोगों ने 14 अक्टूबर से विधानसभा के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परियोजना के अलाइनमेंट पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसा विकल्प निकाला जाए, जिससे कम से कम आवासीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचे।
लोगों का कहना है कि वे विकास परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सड़क निर्माण की योजना बनाते समय वहां रह रहे परिवारों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
‘घर और रोजगार दोनों छिनने का खतरा’
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के संयोजक सुशील कुमार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में कई परिवार दशकों से रह रहे हैं। इनमें ऐसे परिवार भी हैं, जिन्होंने जीवनभर की कमाई अपने घर बनाने में लगा दी। कुछ परिवारों के मकानों के नक्शे वर्षों पहले नगरपालिका से स्वीकृत होने की बात भी कही जा रही है।
सुशील कुमार के मुताबिक, कई लोग अपने घरों के साथ-साथ दुकानों और छोटे व्यवसायों से होने वाली आमदनी पर निर्भर हैं। यदि सड़क निर्माण के कारण उनके मकान और दुकानें प्रभावित होती हैं, तो उनके सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए अचानक दूसरी जगह घर बनाना या रोजगार की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। इसलिए प्रशासन और संबंधित विभाग को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
पुराने अलाइनमेंट को छोड़ने पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि पुराने अलाइनमेंट के बजाय रेलवे लाइन के समानांतर नया रूट चुनने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अधिक असर पड़ने की आशंका है। वे यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि इस क्षेत्र में सड़क परियोजना की योजना पहले से तैयार थी, तो यहां मकानों के नक्शे कैसे स्वीकृत होते रहे और जमीनों की रजिस्ट्री कैसे होती रही।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घरों पर निशान लगाए जाने से पहले उन्हें परियोजना के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों को अपनी आपत्तियां रखने और वैकल्पिक सुझाव देने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिला।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों को समय रहते जानकारी देना और उनकी समस्याओं पर विचार करना जरूरी है, ताकि बाद में इस तरह का विवाद पैदा न हो।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वे जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।
स्थानीय निवासी त्रिलोक सिंह नेगी ने बताया कि मोहकमपुर से आशारोड़ी तक करीब 12.7 किलोमीटर के हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और एलिवेटेड रोड से जुड़ी अलग-अलग व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। उनका कहना है कि विशेष रूप से मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक नए अलाइनमेंट के कारण बड़ी संख्या में मकान प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जब स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से संपर्क किया, तो उन्हें जानकारी दी गई कि सड़क निर्माण का काम विभाग को उपलब्ध कराई गई जमीन के आधार पर किया जाएगा। लोगों को इस मामले में राज्य सरकार से बातचीत करने की सलाह भी दी गई। इसके बाद से प्रभावित परिवार सरकार से हस्तक्षेप करने और पहले प्रस्तावित रूट पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं।
300 से ज्यादा घर और 1,200 से अधिक लोगों पर असर पड़ने का दावा
स्थानीय निवासी पारितोष भटनागर का दावा है कि नए अलाइनमेंट के कारण 300 से अधिक घर प्रभावित हो सकते हैं और 1,200 से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि संभावित नुकसान केवल उन मकानों तक सीमित नहीं रहेगा, जिन पर फिलहाल निशान लगाए गए हैं। सड़क के आसपास स्थित अन्य आवासीय संपत्तियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पारितोष भटनागर के अनुसार, क्षेत्र में बुजुर्गों सहित कई ऐसे परिवार रहते हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई घर बनाने में लगा दी। इस उम्र में उनके लिए दूसरी जगह जाकर नया मकान बनाना या रहने की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को न तो समय रहते परियोजना की पूरी जानकारी दी गई और न ही उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला। हालांकि, प्रभावित घरों और लोगों की वास्तविक संख्या सर्वे पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
‘हम सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं’
स्थानीय निवासी उषा पंवार का कहना है कि उन्हें भी परियोजना की जानकारी तब मिली, जब उनके घर पर निशान लगाए जाने लगे। उनके मुताबिक, आसपास के कई परिवार इस स्थिति से प्रभावित हैं और लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़क परियोजना पहले से प्रस्तावित थी, तो क्षेत्र में मकानों के नक्शे पास करने और जमीनों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्यों जारी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि ऐसा विकल्प चुना जाए, जिससे उनके घरों और आजीविका को कम से कम नुकसान पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों का जोर इस बात पर है कि यातायात की समस्या का समाधान निकालते समय स्थानीय निवासियों के आवासीय अधिकारों और आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए।
पुराने रूट और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करने की मांग
73 वर्षीय स्थानीय निवासी विनोद कुमार वर्मा के अनुसार, प्रभावित लोगों ने अपनी समस्याओं को सामने रखने के लिए संघर्ष समिति बनाई है और अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से प्रभावित लोगों को 23 अक्टूबर को बुलाया गया है।
विनोद कुमार वर्मा का कहना है कि स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग है कि एलिवेटेड रोड को पहले प्रस्तावित मोहकमपुर से रिस्पना पुल वाले मार्ग पर बनाया जाए। इसके अलावा डोईवाला, मोथरोवाला, बंजारावाला और दुधली रोड जैसे वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि उनकी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करके ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे ट्रैफिक की समस्या का भी समाधान हो और बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से विस्थापित होने की आशंका का सामना न करना पड़े।
NHAI ने बताया क्यों चुना गया नया अलाइनमेंट
इस विवाद पर NHAI के अधिकारी सौरभ सिंह ने विभाग का पक्ष रखते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर प्रिंस चौक से जोगीवाला तक यातायात का दबाव काफी अधिक है। इस समस्या को कम करने के लिए कंसल्टेंट के माध्यम से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई गई और अलग-अलग विकल्पों का अध्ययन किया गया।
सौरभ सिंह के अनुसार, पुराने अलाइनमेंट पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की स्थिति में बड़ी संख्या में मकान और अन्य संरचनाएं प्रभावित हो सकती थीं। मौजूदा हाईवे को चौड़ा करने में भी दोनों तरफ घनी आबादी और बड़ी इमारतें होने के कारण कठिनाइयां सामने आ रही थीं।
उन्होंने बताया कि इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए रेलवे लाइन के साथ उपलब्ध जमीन पर नए अलाइनमेंट की संभावना तलाशी गई। विभाग के अध्ययन में इस विकल्प से तुलनात्मक रूप से कम मकान और संरचनाएं प्रभावित होने की बात सामने आई, जिसके आधार पर नए अलाइनमेंट को स्वीकृति दी गई।
सर्वे के बाद तय होगा मुआवजा
NHAI के अधिकारी सौरभ सिंह के मुताबिक, फिलहाल नए रूट के तहत प्रभावित होने वाले मकानों और जमीनों का आकलन करने के लिए सर्वे और मार्किंग की जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि किस संपत्ति का कितना हिस्सा प्रस्तावित परियोजना की जद में आ रहा है।
उन्होंने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। देहरादून में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLO) के माध्यम से जमीन और उस पर बनी संरचनाओं के मुआवजे का आकलन किया जाएगा। मुआवजे की राशि संबंधित क्षेत्र की स्थिति और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होगी।
हालांकि, मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर विभाग का पक्ष सामने आने के बावजूद स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता अपने घरों और रोजगार को बचाने की है। वे चाहते हैं कि अलाइनमेंट पर दोबारा विचार किया जाए और वैकल्पिक रास्तों की संभावनाओं की भी जांच हो।
विकास परियोजना और स्थानीय लोगों की चिंताओं के बीच समाधान की चुनौती
मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को लेकर फिलहाल स्थानीय लोगों और NHAI के बीच मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। एक ओर विभाग नए अलाइनमेंट को ट्रैफिक दबाव कम करने और तुलनात्मक रूप से कम संपत्तियों को प्रभावित करने वाला विकल्प बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय परिवार अपने घरों और रोजगार पर मंडराते खतरे को लेकर विरोध कर रहे हैं।
अब सर्वे के निष्कर्ष, प्रभावित संपत्तियों का आकलन और स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। यह देखना होगा कि संबंधित विभाग और राज्य सरकार लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए क्या समाधान निकालते हैं। फिलहाल प्रभावित परिवार पुराने अलाइनमेंट पर दोबारा विचार करने और अपनी समस्याओं का उचित समाधान मिलने की मांग कर रहे हैं।