Uttarakhand में बारिश से 41.908 हेक्टेयर फसल प्रभावित, चंपावत में सबसे ज्यादा नुकसान

स्वदेशी टाइम्स, देहरादून : Uttarakhand में इस साल मॉनसून के दौरान हुई लगातार बारिश और आपदा का असर किसानों की फसलों पर भी पड़ा है। कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 जून से 17 सितंबर तक प्रदेश में कुल 41.908 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसमें 33 प्रतिशत से कम, 33 प्रतिशत से अधिक और पूरी तरह प्रभावित फसल क्षेत्र से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

रिपोर्ट में धान, मंडुवा, झंगोरा, मक्का, गेहूं, सब्जियों, फलदार फसलों और अन्य कृषि उत्पादों को हुए नुकसान का विवरण दर्ज किया गया है। जिलावार आंकड़ों में चंपावत 27.390 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र के साथ सबसे आगे है।

चंपावत में 27.390 हेक्टेयर फसल प्रभावित

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंपावत जिले में सबसे ज्यादा फसल नुकसान दर्ज हुआ है। यहां कुल 27.390 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। इसमें चंपावत क्षेत्र में 16.050 हेक्टेयर, पाटी में 7.950 हेक्टेयर, बाराकोट में 2.850 हेक्टेयर और लोहाघाट में 0.540 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की जानकारी है।

इन सभी आंकड़ों को मिलाने पर जिले का कुल प्रभावित क्षेत्र 27.390 हेक्टेयर पहुंचता है। प्रदेश के कुल 41.908 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र में चंपावत की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों के अनुसार फसल क्षति की अलग-अलग श्रेणियां भी दर्ज की गई हैं।

रुद्रप्रयाग में 5.105 हेक्टेयर का नुकसान

रुद्रप्रयाग भी फसल प्रभावित होने वाले प्रमुख जिलों में शामिल है। यहां कुल 5.105 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। ऊखीमठ क्षेत्र में मलबा आने और भूमि कटाव से जुड़े नुकसान की कई प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं।

इनमें खलियान में 2.000 हेक्टेयर, पौंधी में 0.150 हेक्टेयर, लिस्वाल्टा में 0.110 हेक्टेयर, धारकुड़ी में 0.265 हेक्टेयर, पुजारगांव में 1.000 हेक्टेयर, किमाणा में 1.200 हेक्टेयर और रायड़ी में 0.380 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार यहां मंडुवा सहित पहाड़ी इलाकों में उगाई जाने वाली विभिन्न खरीफ फसलों पर मौसम और आपदा का असर पड़ा है।

नैनीताल में 5 हेक्टेयर फसल प्रभावित

नैनीताल जिले में कुल 5.000 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आया है। रिपोर्ट में ओखलकांडा क्षेत्र से नुकसान दर्ज किया गया है। यहां मक्का, मंडुवा, फलदार फसल, सब्जी, मोटा अनाज और अन्य फसलों के प्रभावित होने का उल्लेख है।

नैनीताल में दर्ज कुल नुकसान भी प्रदेश के प्रभावित क्षेत्र में बड़ा हिस्सा रखता है।

उत्तरकाशी में नौगांव और मोरी तक पहुंचा असर

उत्तरकाशी में कुल 3.550 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इसमें नौगांव क्षेत्र में 1.200 हेक्टेयर और दूसरी प्रविष्टि में 0.750 हेक्टेयर, डुंडा में 0.400 हेक्टेयर तथा मोरी में 1.200 हेक्टेयर फसल प्रभावित दर्ज की गई है।

इस जिले में भी नुकसान अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज हुआ है और रिपोर्ट में मंडुवा सहित अन्य पहाड़ी फसलों पर असर का उल्लेख किया गया है।

अल्मोड़ा में 0.590 हेक्टेयर नुकसान

अल्मोड़ा जिले में कुल 0.590 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र दर्ज किया गया है। इसमें चौखुटिया में 0.430 हेक्टेयर शामिल है, जिसकी अलग-अलग प्रविष्टियों में 0.208 और 0.012 हेक्टेयर का उल्लेख है।

इसके अलावा ताकुला में 0.030 हेक्टेयर, डिगरा में 0.030 हेक्टेयर, आगरा रोखाकुड़ी में 0.010 हेक्टेयर और हवलबाग में 0.090 हेक्टेयर फसल भूमि प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।

चमोली और हरिद्वार में भी नुकसान दर्ज

चमोली जिले में 0.140 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। नंदानगर क्षेत्र की प्रविष्टियों में 0.08 और 0.06 हेक्टेयर की क्षति दर्ज है।

वहीं हरिद्वार में 0.133 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र सामने आया है। दूसरी ओर देहरादून, पिथौरागढ़, पौड़ी और टिहरी में रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्र 0.000 हेक्टेयर दर्ज किया गया है।

33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति का आंकड़ा 31.791 हेक्टेयर

कृषि विभाग की रिपोर्ट में कुल 41.908 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र दर्ज है। इसमें 0.4580 हेक्टेयर क्षेत्र 33 प्रतिशत से कम फसल क्षति की श्रेणी में है, जबकि 31.791 हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति दर्ज की गई है।

इसके अलावा रिपोर्ट में 6.8398 हेक्टेयर, 0.3510 हेक्टेयर, 5.723 हेक्टेयर और 1.042 हेक्टेयर के अलग-अलग क्षति अथवा प्रभावित क्षेत्र के आंकड़े भी दर्ज हैं। हालांकि 31.791 हेक्टेयर को कुल नुकसान नहीं माना जा सकता। सरकारी रिकॉर्ड में प्रदेश का कुल प्रभावित क्षेत्र 41.908 हेक्टेयर दर्ज है।

मॉनसून की वापसी के बीच किसानों को राहत की उम्मीद

15 सितंबर के बाद प्रदेश में मॉनसून की वापसी का दौर शुरू हो जाता है, लेकिन इस सीजन में बारिश और आपदा ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। पहाड़ी जिलों में कई स्थानों पर मलबा और भूमि कटाव के कारण खेत प्रभावित हुए, जबकि मैदानी और अन्य क्षेत्रों में जलभराव समेत मौसम से जुड़ी समस्याओं का असर फसलों पर पड़ा।

अभी कृषि विभाग की रिपोर्ट दर्ज नुकसान की स्थिति को सामने रखती है। मॉनसून की वापसी के दौरान यदि आगे भी बारिश होती है तो प्रभावित क्षेत्र के आंकड़ों में बदलाव संभव है। अंतिम आकलन के बाद नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

कृषि मंत्री बोले- प्रभावित किसानों को राहत देने का प्रयास

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई है, उन्हें राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।

किसानों ने आपदा मद से तत्काल राहत की मांग की

वहीं पर्वतीय कृषक कृषि बागवानी और उद्यमी संगठन के महासचिव दीपक करगेती का कहना है कि आपदा मद में किसानों को प्राथमिकता के आधार पर राहत दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को बारिश और आपदा से नुकसान हुआ है और उन्हें जल्द आर्थिक सहायता नहीं मिली तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

फिलहाल सरकारी आंकड़ों में 41.908 हेक्टेयर कुल प्रभावित क्षेत्र दर्ज है और 27.390 हेक्टेयर नुकसान के साथ चंपावत सबसे अधिक प्रभावित जिला है।